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कंबोडिया साइबर गुलामी केस में NIA का बड़ा एक्शन, पटना कोर्ट में 5 आरोपियों पर चार्जशीट

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कंबोडिया मानव तस्करी और साइबर गुलामी मामले में NIA ने पटना की विशेष अदालत में मुख्य आरोपी आनंद कुमार सिंह समेत 5 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। युवाओं को नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजने और साइबर ठगी में धकेलने का आरोप है।

पटना/आलम की खबर:देशभर में तेजी से फैल रहे साइबर अपराध और मानव तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई की है। कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी और साइबर गुलामी मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पटना स्थित विशेष अदालत में मुख्य आरोपी आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। इस मामले ने न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश में युवाओं को विदेश में नौकरी के नाम पर फंसाने वाले संगठित गिरोहों की भयावह सच्चाई को सामने ला दिया है।

जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी युवाओं को विदेश में बेहतर नौकरी, मोटी सैलरी और सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर कंबोडिया भेजते थे। वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट और जरूरी दस्तावेज जब्त कर लिए जाते थे और फिर उन्हें साइबर ठगी से जुड़े अवैध कामों में जबरन लगाया जाता था। एनआईए का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था और इसके तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं।

पटना की विशेष अदालत में दाखिल आरोप पत्र में मुख्य आरोपी आनंद कुमार सिंह को इस पूरे गिरोह का सरगना बताया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक वह भारत में एजेंटों और ट्रैवल नेटवर्क के माध्यम से युवाओं की भर्ती करता था। इसके बाद कंबोडिया में मौजूद अपने सहयोगियों की मदद से उन्हें अवैध रूप से साइबर फ्रॉड कंपनियों में पहुंचाया जाता था। आरोप है कि युवाओं को नौकरी का झांसा देकर एक तरह से साइबर गुलामी की दुनिया में धकेल दिया जाता था।

एनआईए की चार्जशीट में जिन अन्य आरोपियों का नाम शामिल है उनमें अभय नाथ दुबे, अभिरंजन कुमार और रोहित यादव प्रमुख हैं। इन तीनों को इसी वर्ष फरवरी में कंबोडिया से दिल्ली पहुंचने के बाद गिरफ्तार किया गया था। वहीं पांचवां आरोपी प्रहलाद कुमार सिंह फिलहाल जमानत पर बाहर बताया जा रहा है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में अभी और भी लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है।

जांच के दौरान कई पीड़ितों ने जो खुलासे किए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले बताए जा रहे हैं। पीड़ितों के अनुसार कंबोडिया पहुंचने के बाद उन्हें फर्जी कंपनियों में ऑनलाइन ठगी से जुड़े काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। उन्हें अलग-अलग देशों के लोगों को कॉल करने, फर्जी निवेश योजनाओं का झांसा देने और डिजिटल फ्रॉड करने के निर्देश दिए जाते थे। जो युवक इन कामों से इनकार करते थे, उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था।

एनआईए की रिपोर्ट के मुताबिक विरोध करने वाले युवाओं को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी जाती थी। पीड़ितों ने जांच एजेंसी को बताया कि उन्हें कई-कई दिनों तक बंद कमरों में रखा जाता था, मारपीट की जाती थी और कई बार बिजली के झटके तक दिए जाते थे। कुछ मामलों में भोजन और पानी तक रोक देने की बात भी सामने आई है। जांच एजेंसी इसे आधुनिक मानव तस्करी और साइबर गुलामी का संगठित नेटवर्क मान रही है।

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एनआईए के अनुसार आरोपियों द्वारा प्रत्येक युवक को साइबर कंपनियों तक पहुंचाने के बदले दो हजार से तीन हजार अमेरिकी डॉलर तक की रकम ली जाती थी। यानी युवाओं को नौकरी दिलाने के नाम पर उन्हें सीधे साइबर अपराध के नेटवर्क में बेच दिया जाता था। एजेंसी को शक है कि इस पूरे नेटवर्क के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैले हो सकते हैं और इसमें कई अन्य देशों के लोग भी शामिल हो सकते हैं।

जांच एजेंसी अब इस गिरोह से जुड़े ट्रैवल एजेंटों, फर्जी भर्ती एजेंसियों और आर्थिक लेनदेन की भी जांच कर रही है। कई बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन को खंगाला जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क के जरिए कितनी रकम का लेनदेन हुआ। एजेंसी को आशंका है कि देश के कई राज्यों के युवक इस गिरोह के शिकार हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर अपराध से जुड़े गिरोह लगातार सक्रिय हो रहे हैं। सोशल मीडिया, ऑनलाइन विज्ञापन और फर्जी जॉब पोर्टल के जरिए युवाओं को टारगेट किया जाता है। बेरोजगारी और बेहतर कमाई की चाह में कई युवा बिना पूरी जानकारी जांचे ऐसे प्रस्तावों के झांसे में आ जाते हैं। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं।

कानूनी जानकारों के अनुसार यह मामला केवल मानव तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध, अवैध बंधक बनाना और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे गंभीर पहलू भी जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि इस मामले की जांच राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी द्वारा की जा रही है। आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

फिलहाल पटना की विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया और तेज हो गई है। एनआईए अब इस नेटवर्क के बाकी सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है। इस कार्रवाई को मानव तस्करी और साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। साथ ही यह मामला युवाओं के लिए भी एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है कि विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले हर प्रस्ताव पर आंख बंद कर भरोसा करना कितना खतरनाक साबित हो सकता है।

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